75+ Best {Rahat Indori Shayari} in Hindi

Rahat Indori Shayari in Hindi

rahat indori shayari in hindi

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो


जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे


बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए


मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिये था,
चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिये था|


बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ।


कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे
जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे


फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया
ये तेरा खत तो नहीं है जो जला ना सकूं


शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए


रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है


नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है


मेरी आंखों में कैद थी बारिश,
तुम ना आए तो हो गई बारिश।
आसमानों में ठहर गया सूरज,
नदियों में ठहर गई बारिश।


jo taur hai duniya ka usi taur se bolo
bahron ka ilaqa hai zara zor se bolo


सरहदों पर बहोत तनाव है क्या
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या


मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।


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हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।


दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए


न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
मारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा


आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो


फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो


लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।


मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी है

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