Rahat Indori Shayari in Hindi

Rahat Indori Shayari at Hindi: Rahat Indori came to this world on earth, in the First Place, The Faculties before Rahat Indori climbed to Be a renowned as Rahat indori Shayari at Hindi or favorite lyricist at Bollywood. His dad was Rafatullah Qureshi along with mommy was Maqbool U N Nisa Begum. Rahat Indori Finished his MA in Barkatullah University Rahat indori Launched Write Shayari Novels and he also used as a respected Ph.D. for his topic in 1985, that had been Pradesh. He recited his first Shayari if he was only 1 9 this pure and Even distinct Hindi Shayari was valued. Read here a couple Rahat In Door Shayari in Hindi that he Started to take a teacher’s job in Urdu magazines In UK University, Indore and received watching Shayaries as well as begun To find invitations from anyplace in India and in foreign nations

He has been gift for Shayari and symposiums in the majority of the Nations of India who have overly traveled every-where that’s worked up about learning about Rahat Indori, Hindi Shayari poet, Ghazals, poetry and lyrics will probably be amazed to comprehend Rahat Indori started his livelihood as a professor of Hindi Shayari Books. Instantly he attained reputation one of his school students due to their brilliance in Addition to advice on just 1 hand and started getting invitations to Discuss his composing as well as Shayari in each nation and even in foreign states, nevertheless

Rahat Indore Shayari in Hindi

rahat indori shayari in hindi

Rahat Indori Sad Shayari 

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे.


बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए.


मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी है.


उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता हैं.


Rahat Indori Politics Shayari

सरहदों पर बहोत तनाव है क्या कुछ पता तो करो चुनाव है क्या.


जंग है तो जंग का मंज़र भी होना चाहिए सिर्फ नेज़े हाथ में हैं सर भी होना चाहिए.


jo taur hai duniya ka usi taur se bolo bahron ka ilaqa hai zara zor se bolo.


पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं ज़मीन जहां भी खुले घर निकलने लगते हैं बलंदियों का तसव्वुर भी खूब होता है कभी-कभी तो मेरे पर निकलने लगते हैं.


Rahat Indori Dosti Shayari in Hindi 

कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे.


फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया ये तेरा खत तो नहीं है जो जला ना सकूं.


शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए.


तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो.


Rahat Indori Romantic Shayari 

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता है उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं.


जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं अगर अनारकली हैं सबब बगावत का सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं.


हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते, जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते, अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है, उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते.


न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा मारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा.


Rahat Indori Shayari on Maa

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है.


माँ के क़दमों के निशां हैं कि दिए रौशन हैं ग़ौर से देख यहीं पर कहीं जन्नत होगी.


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हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिएमाँ  हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे.


ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे.