Rahat Indori Shayari in Hindi

Rahat Indori Shayari in Hindi: Rahat Indori came into this world on the, to begin with, The 1st month of the year 1950 and Rahat Indori also did pedagogy at the Indore Universities before Rahat Indori grew to become a well-known as Rahat indori Shayari in  Hindi or popular lyricist in Bollywood. His father was Rafatullah Qureshi and also mother was Maqbool UN Nisa Begum. Rahat Indori finished his MA from Barkatullah University Rahat indori Started Write Shayari Books and he also used as an honored Ph.D. for his subject in 1985, which was named Rahat indori Shayari in Hindi, by the Bhoj College, located in Madhya Pradesh. He recited his very first Shayari when he was just 19 this pure and even different Hindi Shayari was most valued. Read right here a few Rahat Indoor Shayari in Hindi he began to take up a teacher’s work in Urdu magazines at UK University, Indore and also received watching Shayaries and even started to find invites from everywhere in India and also in foreign countries. Rahat Indori was a great scholar as well as captain of the college football and hockey groups in school and university stages. Rahat Indori recited his very first Shayari in his university times while Rahat Indori was just nineteen.

Rahat Indori Started His carries performed Shayari and also Kavi Sammelan from the final forty – forty-five Ages. Rahat Indori  Shayari in Hindi, he traveled greatly all over the world to recite Shayari. He carries been present for Shayari and symposiums in most of the Countries of India that have too traveled  Everywhere that is excited about learning regarding Rahat Indori, Hindi Shayari poet, Ghazals, poems and also lyrics will be shocked to recognize that Rahat Indori started his profession since a professor of Hindi Shayari Books. Quickly, he achieved reputation among his college students for his brilliance as well as information on just one hand and began obtaining invites to talk about his writing and even Shayari in every state and even in foreign countries, however. Quickly he began finding tasks at several Bollywood tasks including his literary functions in Urdu were finding valued everywhere.

Dr. Rahat Indori’s journey Hindi Shayari carries the standard tough-times-to-tinsel-town factor to it. A Painter converted Professor, Shayari after which Hindi movie Lyricist. Rahat Indori was a Pedagogist of Urdu magazines in Rahat Indori Shayari in Hindi Universities before his character was seen by Mumbai’s movie company and audience of Rahat Indori Hindi Shayari around the world. A complete man, with philosophic propensities, Rahat Indori is well-known for his Shayari grandeur and also definite dedication to effort.

Rahat Indore Shayari in Hindi

rahat indori shayari in hindi

Rahat Indori Politics Shayari

सरहदों पर बहोत तनाव है क्या
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या


जंग है तो जंग का मंज़र भी होना चाहिए
सिर्फ नेज़े हाथ में हैं सर भी होना चाहिए


jo taur hai duniya ka usi taur se bolo
bahron ka ilaqa hai zara zor se bolo


Rahat Indori Romantic Shayari 

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं
चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता है
उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो
धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं


जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं
अगर अनारकली हैं सबब बगावत का
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं


हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।


Rahat Indori Sad Shayari 

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे


बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए


मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी है


Rahat Indori Shayari on Maa

माँ के क़दमों के निशां हैं कि दिए रौशन हैं
ग़ौर से देख यहीं पर कहीं जन्नत होगी


Rahat Indori Dosti Shayari in Hindi 

Dosti jab kisi se ki jaye
Dushmanon ki bhi raye li jaye


तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो


मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिये था,
चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिये था|


बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ।


कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे
जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे


फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया
ये तेरा खत तो नहीं है जो जला ना सकूं


शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए


रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है


नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है


मेरी आंखों में कैद थी बारिश,
तुम ना आए तो हो गई बारिश।
आसमानों में ठहर गया सूरज,
नदियों में ठहर गई बारिश।


मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।


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हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।


न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
मारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा


आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो


फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो


लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।