Munawwar Rana Shayari in Hindi

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Munawwar Rana shayari in Hindi

Munawwar Rana Shayari in Hindi


Munawwar Rana  Desh Bhakti Shayari 

अब तक जिसका खून न खौला हों
वो खून नहीं, वो पानी है
जो देश के काम ना आये
वो बेकार जवानी है


मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए
बस अमन से भरा यह वतन चाहिए
जब तक जिंदा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए
और जब मरूं तो तिरंगा ही कफन चाहिए


वतन वालो वतन ना बेच देना
ये धरती ये गगन ना बेच देना
शहीदो ने जान दि है वतन के वास्ते
शहीदो के कफन ना बेच देना


Munawwar Rana Ishq Shayari 

आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें
टूटा-फूटा ही सही घर-बार होना चाहिए


कभी वतन को महबूब बना के देखो
तुझ पे मरेगा हर कोई
इश्क तो करता है हर कोई
महबूब पे तो मरता है हर कोई


जमाने भर में मिलते हैं आशिक कई
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता
नोटों में लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं कई
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफन नहीं होता


तेरे एहसास की ईंटें लगी हैं इस इमारत में
हमारा घर तेरे घर से कभी ऊँचा नहीं होगा


Munawwar Rana Maa Shayari

खाने की चीज़ें माँ ने जो भेजी हैं गाँव से
बासी भी हो गई हैं तो लज़्ज़त वही रही


मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ


मुख़्तसर होते हुए भी ज़िंदगी बढ़ जाएगी
माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी


चलती फिरती आँखों से अज़ाँ देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है


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मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता
अब इस से ज़यादा मैं तेरा हो नहीं सकता


किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा


मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना


दावर-ए-हश्र तुझे मेरी इबादत की कसम
ये मेरा नाम-ए-आमाल इज़ाफी होगा
नेकियां गिनने की नौबत ही नहीं आएगी
मैंने जो मां पर लिक्खा है, वही काफी होगा


मेरे चेहरे पे ममता की फ़रावानी चमकती है
मैं बूढ़ा हो रहा हूँ फिर भी पेशानी चमकती है


मेरे हौंसले न तोड़ पाओगे तुम
क्योंकि मेरी शहादत ही अब मेरा धर्म है
सीमा पे डटकर खड़ा हूं, क्योंकि ये मेरा वतन है


हाँ, मैं इस देश का वासी हूँ
इस माटी का कर्ज चुकाऊंगा
जीने का दम रखता हूँ
तो इसके लिए मरकर भी दिखलाऊंगा