Mulaqat Shayari in Hindi

खुशिया किसी की मोहताज नहीं होती, दोस्ती यूँही इत्तेफ़ाक़ से नहीं होती कुछ तो मायने होंगे इस पल के, वरना यूँही आपसे मुलाक़ात नहीं होती.


काश आपकी सूरत इतनी प्यारी ना होती; काश आपसे मुलाक़ात हमारी ना होती; सपनो में ही देख लेते हम आपको; तो आज मिलने की इतनी बेकरारी ना होती.


मिलने आयेंगे आपसे ख़्वाबों में जरा रोशनी के दिए बुझा दीजिये अब और नहीं होता इंतज़ार आपसे मुलाक़ात का अपनी आँखों के पलके गिरा दीजिये.


अगर हमारी आपसे मुलाक़ात होगई होती आपकी आपके दिलसे अदावत होगई होती.


इस उम्मीद में करते हैं इंतज़ार हम रात का; कि शायद सपनों में कभी आपसे मुलाक़ात हो जाये.


मोहब्बत ना सही मुकदमा ही कर दो मुझ पर, कम से कम तारीख दर तारीख मुलाक़ात तो हो आपसे.


माना की आपसे रोज मुलाक़ात नही होती आमने-सामने कभी बात नही होती मगर हर सुबह आपको दिलसे याद कर लेते है उसके बिना हमारे दिन की शुरुआत नहीं होती.


मेरी हर गजलो में तेरी बात आज भी है, आपसे खयालों में मुलाक़ात आज भी है , तुझे भुला देना मेरे बस में नहीं शायद, यु तो हसीनों से मुलाक़ात आज भी है.


कभी आपसे जो मुलाक़ात होगी यहीं सोचती हूँ की क्या बात होगी भले दूर होंगे वोह मेरी नज़र से मगर याद उनकी मिरे साथ होगी.


कुछ ज़्यादा तो नहीं माँगा था हमने तुमसे ऐ ज़िंदगी, छोटी सी आरज़ू थी उनसे मुलाक़ात-ऐ-गुफ़्तगू की.


वक़्त आखरी था उनसे दुआ-सलाम कर लिया बस इतनी सी मुलाक़ात ने बदनाम कर दिया.


यूँ तो खुद की सैलाने-तबीयत का अंदाज़ मुश्किल था उनसे मुलाक़ात हुई तो जाना ये दिल किस काबिल था.


जबसे मुलाक़ात हुयी है उनसे मेरी, तबसे मेरे दिल को करार आया, कभी ज़ुल्फ़ लहराई कभी नखरा किया, उनकी इन अदाओं पर बहोत प्यार आया.