Mirza Ghalib Shayari in Hindi

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास , जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले , अदल के तुम न हमे आस दिलाओ , क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले.


Aata hai daagh-e-hasrat-e-dil ka shumaar yaadi Mujh se mire gunah ka hisaab ai khuda Na maang.


वो मेरा प्यार, तलब और मेरा चैन -ओ -क़रार , जफ़ा की हद में ज़माने का हो चूका होगा ,, तुम उसकी राह न देखो वो ग़ैर था साक़ी , भुला दो उसको वो ग़ैरों का हो चूका होगा.


Sambhalne de mujhe ‘ei na_ummidee kya qayaamat hai, Ki daamaan-e-KHayaal-e-yaar chooTa jaaye hai mujhse.


दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई , दोनों को एक अदा में रजामंद कर गई, मारा ज़माने ने ‘ग़ालिब’ तुम को , वो वलवले कहाँ , वो जवानी किधर गई.


Naqsh fariyaadee hai kiskee shoKHee-e-tehreer ka, KaaGHazee hai pairhan har paikar-e-tasweer ka.


इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही , मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही , कटा कीजिए न तालुक हम से , कुछ नहीं है तो अदावत ही सही.


Kaave-kaave saKHt_jaanee haay tanhaaee Na pooch, Subah karna shaam ka laana hai joo-e-sheer ka.


नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ-बाज़ू को, ये लोग क्यूँ मेरे ज़ख़्मे जिगर को देखते हैं, तेरे ज़वाहिरे तर्फ़े कुल को क्या देखें, हम औजे तअले लाल-ओ-गुहर को देखते हैं.


Woh bad_KHoo aur meree daastan-e-ishq tulaanee, Ibaarat muKHtasar, qaasid bhee ghabra jaaye hai mujhse.


Qat’a keejiye Na taalluk ham se, Kuchh nahi hai to adaavat hi sahiqat.