Maut Shayari in Hindi

साँसों के सिलसिले को न दो ज़िंदगी का नाम, जीने के बावजूद भी मर जाते हैं कुछ लोग.


मिट्टी मेरी कब्र से उठा रहा है कोई, मरने के बाद भी याद आ रहा है कोई, कुछ पल की मोहलत और दे दे ऐ खुदा, उदास मेरी कब्र से जा रहा है कोई.


मौत को तो यूँ ही बदनाम करते हैं लोग, तकलीफ तो साली ज़िन्दगी देती है उनसे बिछड़े तो मालूम हुआ मौत क्या चीज है ज़िन्दगी वो थी जो हम उनकी महफ़िल में गुजार आए.


एक दिन जब हुआ इश्क का एहसास उन्हें वो हमारे पास आके सारा दिन रोते रहे और हम भी इतना खुदगर्ज निकले यारो आँखे बंद करके कफन में सोते रहे.


साँसों के सिलसिले को न दो ज़िंदगी का नाम, जीने के बावजूद भी मर जाते हैं कुछ लोग.


जरा चुपचाप तो बैठो कि दम आराम से निकले, इधर हम हिचकी लेते हैं उधर तुम रोने लगते हो.


अब मौत से कह दो कि नाराज़गी खत्म कर ले, वो बदल गया है जिसके लिए हम ज़िंदा थे​.


मैं अब सुपुर्दे ख़ाक हूँ मुझको जलाना छोड़ दे, कब्र पर मेरी तू उसके साथ आना छोड़ दे, हो सके गर तू खुशी से अश्क पीना सीख ले, या तू आँखों में अपनी काजल लगाना छोड़ दे.


हद तो ये है कि मौत भी तकती है दूर से, उसको भी इंतजार मेरी खुदकुशी का है.