1000+ Happy Mahatma Gandhi Jayanti Status in Hindi

Happy Gandhi Jayanti Status in Hindi

हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें। हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा।


जिस दिन प्रेम की शक्ति, शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जायेगी, दुनिया में अमन आ जायेगा।


क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है।


गरीबी दैवी अभिशाप नहीं बल्कि मानवरचित षडयन्त्र है ।


थोडा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है।


जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वे साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है।


पुस्तकों का मूल्य रत्नों से भी अधिक है, क्योंकि पुस्तकें अन्तःकरण को उज्ज्वल करती हैं।


चरित्र की शुद्धि ही सारे ज्ञान का ध्येय होनी चाहिए।


कायरता से कहीं ज्यादा अच्छा है, लड़तेलड़ते मर जाना।


अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।


आपकी मान्यताएं आपके विचार बन जाते हैं,आपके विचार आपके शब्द बन जाते हैं,आपके शब्द आपके कार्य बन जाते हैं,आपके कार्य आपकी आदत बन जाते हैं,आपकी आदतें आपके मूल्य बन जाते हैं, आपके मूल्य आपकी नियति बन जाती है।


कोई भी संस्कृति जीवित नहीं रह सकती यदि वह अपने को हम दबाव से अनुशासन नहीं सीख सकते।


प्रेम की शक्ति दण्ड की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है।

सुख बाहर से मिलने की चीज नहीं, मगर अहंकार छोड़े बगैर इसकी प्राप्ति भी होने वाली नहीं। अन्य से पृथक रखने का प्रयास करे।


किसी राष्ट्र की संस्कृति उसके लोगों के दिलों और आत्माओं में बसती है।


किसी भी देश की संस्कृति उसके लोगों के ह्रदय और आत्मा में बसती है।


जिज्ञासा के बिना ज्ञान नहीं होता | दुःख के बिना सुख नहीं होता।


यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है।


अपने ज्ञान के प्रति ज़रुरत से अधिक यकीन करना मूर्खता है। यह याद दिलाना ठीक होगा कि सबसे मजबूत कमजोर हो सकता है और सबसे बुद्धिमान गलती कर सकता है।


जब भी आपका सामना किसी विरोधी से हो, उसे प्रेम से जीतें।


कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।


वास्तविक सोन्दर्य ह्रदय की पवित्रता में है।


व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।


अपने से हो सके, वह काम दूसरे से न कराना।


काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है।


समाज में से धर्म को निकाल फेंकने का प्रयत्न बांझ के पुत्र करने जितना ही निष्फल है और अगर कहीं सफल हो जाय तो समाज का उसमे नाश होता है।


शारीरिक उपवास के साथसाथ मन का उपवास न हो तो वह दम्भपूर्ण और हानिकारक हो सकता है।


आप नम्र तरीके से दुनिया को हिला सकते है।


“व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है ।”

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