75+ Top {Dusmani Shayari} in Hindi

Dusmani Shayari in Hindi

दिल को पाला बग़ल में तू ने
गोया दुश्मन से दोस्ती की


मै रिश्तों का जला हुआ हूँ
दुश्मनी भी फूँक – फूँक कर करता हूँ.


इलाही क्यों नहीं उठती कयामत माजरा क्या है,
मारे सामने पहलू में वो दुश्मन बन के बैठे हैं


वो जो बन के दुश्मन हमे जीतने को निकले थे,
कर लेते अगर मोहब्बत तो हम ख़ुद ही हार जाते.


दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद हैं
देखना है खींचता है मुझ पे पहला तीर कौन


मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ
यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे


हम दुश्मन को भी बड़ी शानदार सजा देते हैं,
हाथ नहीं उठाते बस नजरों से गिरा देते हैं.


जब जान प्यारी थी तब दुश्मन हज़ार थे,
अब मरने का शौक है तो कातिल नहीं मिलते


दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम,
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे,


आँखों से आँसुओं के दो कतरे क्या निकल पड़े,
मेरे सारे दुश्मन एकदम खुशी से उछल पडे़…


सच कहते हैं कि नाम मोहब्बत का है बड़ा
उल्फ़त जता के दोस्त को दुश्मन बना लिया


शेर का शिकार किया नहीं जाता,
राजा को दरबार में मारा नहीं जाता,
दुश्मनी अपनी औकात वालों से कर,
क्यूंकि खेल बाप के साथ खेला नहीं जाता…


ये भी इक बात है अदावत की
रोज़ा रक्खा जो हम ने दावत की


मेरी दोस्ती का फायदा उठा लेना, क्युंकी,
मेरी दुश्मनी का नुकसान सह नही पाओगे.


दुश्मन भी मेरे मुरीद हैं शायद,
वक्त बेवक्त मेरा नाम लिया करते है,
मेरी गली से गुजरते हैं छुपा के खंजर,
रू-ब-रू होने पर सलाम किया करते हैं


वैसे दुश्मनी तो हम -कुत्ते- से भी नहीं करते है
पर बीच में आ जाये तो -शेर- को भी नहीं छोड़ते


भाई की पहोंच तो दिल्ली से लेकर ‘कब्रस्थान तक है
आवाज दिल्ली तक जाती है दुश्मन कब्रस्थान तक


मुझे मेरे दोस्तों से बचाइये राही
दुश्मनों से मैं ख़ुद निपट लूँगा.


मैं हैराँ हूँ कि क्यूँ उस से हुई थी दोस्ती अपनी
मुझे कैसे गवारा हो गई थी दुश्मनी अपनी


कू-ए-जानाँ में न ग़ैरों की रसाई हो जाए
अपनी जागीर ये या-रब न पराई हो जाए


ख़ाक मजा है जीने में,
जब तक आग ना लगे दुश्मन के सीने में.

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