Dushmani Shayari in Hindi

वो जो बन के दुश्मन हमे जीतने को निकले थे, कर लेते अगर मोहब्बत तो हम ख़ुद ही हार जाते.


दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद हैं देखना है खींचता है मुझ पे पहला तीर कौन.


मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे.


हम दुश्मन को भी बड़ी शानदार सजा देते हैं, हाथ नहीं उठाते बस नजरों से गिरा देते हैं.


जब जान प्यारी थी तब दुश्मन हज़ार थे, अब मरने का शौक है तो कातिल नहीं मिलते.


सच कहते हैं कि नाम मोहब्बत का है बड़ा उल्फ़त जता के दोस्त को दुश्मन बना लिया.


शेर का शिकार किया नहीं जाता, राजा को दरबार में मारा नहीं जाता, दुश्मनी अपनी औकात वालों से कर, क्यूंकि खेल बाप के साथ खेला नहीं जाता.


ये भी इक बात है अदावत की रोज़ा रक्खा जो हम ने दावत की.


मेरी दोस्ती का फायदा उठा लेना, क्युंकी, मेरी दुश्मनी का नुकसान सह नही पाओगे.


मैं हैराँ हूँ कि क्यूँ उस से हुई थी दोस्ती अपनी मुझे कैसे गवारा हो गई थी दुश्मनी अपनी.


कू-ए-जानाँ में न ग़ैरों की रसाई हो जाए अपनी जागीर ये या-रब न पराई हो जाए.


ख़ाक मजा है जीने में, जब तक आग ना लगे दुश्मन के सीने में.


दोस्ती भी अब लोग अधूरा करते हैं, दुश्मनों की कमी अब तो दोस्त पूरा करते हैं.


ऐ नसीब जरा एक बात तो बता, तु सबको आजमाता हैँ या मुझसे ही दुश्मनी हैँ .


अगर किस्मत आजमाते-आजमाते थक गये हो तो कभी खुद को भी आजमाईए नतीजे बहेतर होंगे.