1000+ Childhood Status in Hindi & English 【 Are U Missing Childhood 】

Childhood Status in Hindi & English

Whoever said that childhood is the happiest time of your life is a liar, or a fool?


Sometimes you have to travel back in time, skirting the obstacles, in order to love someone.


कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी


रोने की वजह भी न थी  न हंसने का बहाना थाक्यो हो गए हम इतने बडे  इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था…..


चले आओ कभी टूटी हुई चूड़ी के टुकड़े से, वो बचपन की तरह फिर से मोहब्बत नाप लेते हैं..


आते जाते रहा कर ए दर्द  तू तो मेरा बचपन का साथी है


Childhood is equal to no problems.


Friends are special because we choose them, we make them a part of our family.


Childhood is just like fun, enjoy, and happiness.


Childhood is a promise that is never kept.


किसने कहा नहीं आती वो बचपन वाली बारिश… तुम भूल गए हो शायद अब नाव बनानी कागज़ की…!!


अजीब सौदागर है ये वक़्त भी  जवानी का लालच दे के बचपन ले गया !!


लगता है माँ बाप ने बचपन में खिलौने नहीं दिए, तभी तो पगली हमारे दिल से खेल गयी !!


बचपन से हर शख्स याद करना सिखाता रहा, भूलते कैसे है ? बताया नही किसी ने…..


No tension, just a fun, I miss my childhood.


I am really thankful that you are a part of my life. You will be always special to me. You are my best friend forever.


No one is there in this world who does not miss childhood.


Childhood is the most beautiful of all life’s seasons.


हंसने की भी, वजह ढूँढनी पड़ती है अब, शायद मेरा बचपन, खत्म होने को है!


वो बचपन की अमीरी न जाने कहां खो गई  जब पानी में हमारे भी जहाज चलते थे…


वो बचपन की अमीरी न जाने कहां खो गई जब पानी में हमारे भी जहाज चलते थे…


अब तक हमारी उम्र का बचपन नहीं गया  घर से चले थे जेब के पैसे गिरा दिए


Literature is a textually transmitted disease, normally contracted in childhood.


In a child’s eyes, a mother is a goddess.


Everyone has that scary nightmare from your childhood that you still remember.


In the happiest of our childhood memories, our parents were happy, too.


मस्ती की बात न कर ऐ दोस्त  अब वो सुकून वाला सन्डे नहीं आता.


याद आता है वो बीता बचपन, जब खुशियाँ छोटी होती थी, बाग़ में तितली को पकड़ खुश होना, तारे तोडना जितनी ख़ुशी देता था.


रोना और मचल जाना,  झोली भर ख़ुशी देते हैं.


बड़े-बड़े मोती से आंसू,  जैसे गले में जयमाला पहनते थे, वो दुःख भी कितने प्यारे थे, तब खिलोने नहीं दिल टुटा करते थे, आज के दिन कैसे दिन हैं, रोने को बारिश का मौसम ढूंढते हैं.

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